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ramayan 6.102.27: इस प्रकार अपने अस्त्रों से विरत हो जाने पर राक्षसराज रावण क्रोध से जल उठा और श्री रघुनाथजी पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगा।   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.102.27 
अस्त्रे प्रतिहते क्रुद्धो रावणो राक्षसाधिप:।
अभ्यवर्षत् तदा रामं घोराभि: शरवृष्टिभि:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपने अस्त्रों से विरत हो जाने पर राक्षसराज रावण क्रोध से जल उठा और श्री रघुनाथजी पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगा।
 
On being thus warded off his weapons, the demon king Ravana burned with rage and began showering fierce arrows on Sri Raghunatha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)