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ramayan 6.102.17: मातलि के ऐसा कहने पर श्री रामचन्द्रजी ने रथ की परिक्रमा की और उसे प्रणाम करके उस पर सवार हो गए। उस समय वे अपने तेज से सम्पूर्ण लोकों को प्रकाशित करने लगे॥ 17॥   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.102.17 
इत्युक्त: सम्परिक्रम्य रथं तमभिवाद्य च।
आरुरोह तदा रामो लोकाँल्लक्ष्म्या विराजयन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मातलि के ऐसा कहने पर श्री रामचन्द्रजी ने रथ की परिक्रमा की और उसे प्रणाम करके उस पर सवार हो गए। उस समय वे अपने तेज से सम्पूर्ण लोकों को प्रकाशित करने लगे॥ 17॥
 
On Matali saying this, Shri Ramchandraji circled around the chariot and after paying his respects to it, rode on it. At that time, he began illuminating all the worlds with his splendor.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)