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ramayan 6.102.14: महाशत्रु शत्रुसूदन श्री रघुवीर! हजार नेत्रों वाले भगवान इन्द्र ने विजय के लिए यह रथ आपको समर्पित किया है॥14॥   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.102.14 
सहस्राक्षेण काकुत्स्थ रथोऽयं विजयाय ते।
दत्तस्तव महासत्त्व श्रीमन् शत्रुनिबर्हण॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाशत्रु शत्रुसूदन श्री रघुवीर! हजार नेत्रों वाले भगवान इन्द्र ने विजय के लिए यह रथ आपको समर्पित किया है॥14॥
 
Great enemy Shatrusudan Mr. Raghuveer! Lord Indra, who has a thousand eyes, has dedicated this chariot to you for victory. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)