श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.102.1 
लक्ष्मणेन तु तद् वाक्यमुक्तं श्रुत्वा स राघव:।
संदधे परवीरघ्नो धनुरादाय वीर्यवान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के वचन सुनकर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले पराक्रमी श्री राम ने अपना धनुष उठाया और उन पर बाण चलाये।
 
Having heard Lakshman's words, the valiant Sri Rama, the slayer of enemy warriors, took up his bow and shot arrows at him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)