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अपने प्राणों के समान प्रिय भाई लक्ष्मण को इस दशा में बाहर भटकते देखकर श्री रघुनाथजी महान शोक से भर गए और चिंता एवं शोक में डूब गए॥9॥
Seeing his brother Lakshman, who was as dear to him as his life, wandering outside in this condition, Sri Raghunatha was filled with great sorrow and was drowned in worry and grief.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥