Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.101.7-8: जैसे स्वप्न में मनुष्यों के शरीर दुर्बल हो जाते हैं, वैसी ही स्थिति मेरे इन अंगों की भी है। दुष्टात्मा रावण के द्वारा दिए गए दुःखद प्रहार से अपने भाई लक्ष्मण को पीड़ा से कराहते हुए देखकर मेरी तीव्र चिन्ता बढ़ती जा रही है और मैं मरने की इच्छा कर रहा हूँ।॥7-8॥ | ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे स्वप्न में मनुष्यों के शरीर दुर्बल हो जाते हैं, वैसी ही स्थिति मेरे इन अंगों की भी है। दुष्टात्मा रावण के द्वारा दिए गए दुःखद प्रहार से अपने भाई लक्ष्मण को पीड़ा से कराहते हुए देखकर मेरी तीव्र चिन्ता बढ़ती जा रही है और मैं मरने की इच्छा कर रहा हूँ।॥7-8॥
‘Just as the bodies of human beings become weak in dreams, the same is the condition of these limbs of mine. My intense anxiety is increasing and I feel like dying on seeing my brother Lakshmana groaning in pain and suffering due to the painful blow given by the evil-spirited Ravana.’॥ 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥