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ramayan 6.101.49: तुम्हारे बिना मुझे अपने प्राण बचाने में, सीता की रक्षा में, और विजय में भी कोई रुचि नहीं है। जब तुम ही नहीं रहोगे, तो मैं इस जीवन का क्या करूँगा?॥49॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.101.49 
नहि मे जीवितेनार्थ: सीतया च जयेन वा।
को हि मे जीवितेनार्थस्त्वयि पञ्चत्वमागते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे बिना मुझे अपने प्राण बचाने में, सीता की रक्षा में, और विजय में भी कोई रुचि नहीं है। जब तुम ही नहीं रहोगे, तो मैं इस जीवन का क्या करूँगा?॥49॥
 
‘Without you, I have no interest in saving my life, Sita or even in victory. When you will not be there, what will I do with this life?’॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)