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ramayan 6.101.42: ऐसा कहकर तथा हनुमानजी की बहुत प्रशंसा करते हुए, वानरश्रेष्ठ सुषेण ने उन जड़ी-बूटियों को उखाड़ दिया।   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.101.42 
एवं कथयमानं तु प्रशस्य पवनात्मजम्।
सुषेणो वानरश्रेष्ठो जग्राहोत्पाटॺ चौषधी:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर तथा हनुमानजी की बहुत प्रशंसा करते हुए, वानरश्रेष्ठ सुषेण ने उन जड़ी-बूटियों को उखाड़ दिया।
 
Saying this and praising Hanuman profusely, the best of the monkeys Sushen uprooted those herbs.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)