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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.101.40 
समागम्य महावेग: संन्यस्य शिखरं गिरे:।
विश्रम्य किंचिद्धनुमान् सुषेणमिदमब्रवीत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उनका वेग बड़ा महान था। उस शिखर को सुषेण के पास ले जाकर उन्होंने पृथ्वी पर रख दिया और थोड़ी देर विश्राम करके हनुमान जी ने सुषेण से इस प्रकार कहा -॥40॥
 
His speed was great. After taking that peak to Sushen, he placed it on the earth and after resting for a while Hanuman ji said to Sushen in this manner -॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)