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ramayan 6.101.34: उसी समय अत्यन्त तेजस्वी हनुमानजी के हृदय में यह विचार उत्पन्न हुआ कि “मैं इस पर्वत शिखर को अपने साथ ले जाऊँ।”॥34॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.101.34 
तस्य बुद्धि: समुत्पन्ना मारुतेरमितौजस:।
इदमेव गमिष्यामि गृहीत्वा शिखरं गिरे:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उसी समय अत्यन्त तेजस्वी हनुमानजी के हृदय में यह विचार उत्पन्न हुआ कि “मैं इस पर्वत शिखर को अपने साथ ले जाऊँ।”॥34॥
 
At this very time the thought arose in the heart of the immensely radiant Hanumanji that “I should take this peak of the mountain with me.”॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)