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ramayan 6.101.33: उनके ऐसा कहने पर हनुमान्‌जी ओषधि पर्वत (महाोदयगिरि) पर गए; परंतु उन महान् वैद्यों को न पहचान पाने के कारण वे चिन्तित हो गए॥33॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.101.33 
इत्येवमुक्तो हनुमान् गत्वा चौषधिपर्वतम्।
चिन्तामभ्यगमच्छ्रीमानजानंस्ता महौषधी:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर हनुमान्‌जी ओषधि पर्वत (महाोदयगिरि) पर गए; परंतु उन महान् वैद्यों को न पहचान पाने के कारण वे चिन्तित हो गए॥33॥
 
On his saying so, Hanuman ji went to Oshadhi Parvat (Mahodayagiri); But due to not recognizing those great healers, they became worried. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)