Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.101.30-33h: सज्जन! आप शीघ्र ही यहाँ से उस पर्वत पर जाएँ, जिसका पता जाम्बवान ने आपको पहले बताया है, और उसके दक्षिणी शिखर पर उगने वाली विशल्यकर्णी 1, सवर्ण्यकर्णी 2, संजीवकर्णी 3 और संधानी 4 नामक प्रसिद्ध महाऔषधियों को यहाँ ले आएँ। हे वीर! इनके द्वारा ही वीर लक्ष्मण के प्राण बचेंगे। 30—32 1/2॥ | ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सज्जन! आप शीघ्र ही यहाँ से उस पर्वत पर जाएँ, जिसका पता जाम्बवान ने आपको पहले बताया है, और उसके दक्षिणी शिखर पर उगने वाली विशल्यकर्णी 1, सवर्ण्यकर्णी 2, संजीवकर्णी 3 और संधानी 4 नामक प्रसिद्ध महाऔषधियों को यहाँ ले आएँ। हे वीर! इनके द्वारा ही वीर लक्ष्मण के प्राण बचेंगे। 30—32 1/2॥
Gentle! Sir, you quickly go from here to the mountain, whose address Jambavan has told you earlier, and bring here the famous mahaushadis named Vishalyakarni 1, Savarnyakarni 2, Sanjeevakarni 3 and Sandhani 4 growing on its southern peak. Daring! Only through them will the life of brave Laxman be saved. 30—32 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥