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ramayan 6.101.28-29h: हे शत्रुओं का दमन करने वाले वीर! तू शोक मत कर। उसके शरीर में प्राण हैं। हे वीर! वह सो गया है। उसका शरीर भूमि पर पड़ा हुआ है, निढाल है। वह साँस ले रहा है और उसका हृदय बार-बार धड़क रहा है - उसकी गति रुकी नहीं है। यह लक्षण उसके जीवित होने का संकेत दे रहा है।॥28 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  6.101.28-29h 
विषादं मा कृथा वीर सप्राणोऽयमरिंदम।
आख्याति तु प्रसुप्तस्य स्रस्तगात्रस्य भूतले॥ २८॥
सोच्छ्वासं हृदयं वीर कम्पमानं मुहुर्मुहु:।
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का दमन करने वाले वीर! तू शोक मत कर। उसके शरीर में प्राण हैं। हे वीर! वह सो गया है। उसका शरीर भूमि पर पड़ा हुआ है, निढाल है। वह साँस ले रहा है और उसका हृदय बार-बार धड़क रहा है - उसकी गति रुकी नहीं है। यह लक्षण उसके जीवित होने का संकेत दे रहा है।॥28 1/2॥
 
‘O brave one who has suppressed the enemies! Do not be sad. There is life in his body. Brave one! He has fallen asleep. His body is lying on the ground, limp. He is breathing and his heart is beating repeatedly – ​​its movement has not stopped. This symptom is indicating that he is alive.’॥28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)