Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.101.27: उनके हाथ कमल के समान कोमल हैं, उनके नेत्र भी अत्यन्त निर्मल हैं। हे प्रजानाथ! मरे हुए मनुष्यों का ऐसा रूप नहीं देखा जाता॥27॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.101.27 
पद्मपत्रतलौ हस्तौ सुप्रसन्ने च लोचने।
नेदृशं दृश्यते रूपं गतासूनां विशां पते॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उनके हाथ कमल के समान कोमल हैं, उनके नेत्र भी अत्यन्त निर्मल हैं। हे प्रजानाथ! मरे हुए मनुष्यों का ऐसा रूप नहीं देखा जाता॥27॥
 
‘The palms of his hands are as soft as lotus, his eyes are also very clear. O Prajanath! Such a form of dead people is not seen.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)