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ramayan 6.101.24-25h: हे नरसिंह! इस व्याकुल मन को त्याग दो, जो बेचैनी उत्पन्न करता है, क्योंकि युद्ध के समय की चिन्ता बाण के समान है और दुःख को ही जन्म देती है॥ 24 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  6.101.24-25h 
त्यजेमां नरशार्दूल बुद्धिं वैक्लव्यकारिणीम्॥ २४॥
शोकसंजननीं चिन्तां तुल्यां बाणैश्चमूमुखे।
 
 
अनुवाद
हे नरसिंह! इस व्याकुल मन को त्याग दो, जो बेचैनी उत्पन्न करता है, क्योंकि युद्ध के समय की चिन्ता बाण के समान है और दुःख को ही जन्म देती है॥ 24 1/2॥
 
O lion of men! Give up this anxious mind which creates restlessness, because anxiety at the brink of battle is like arrows and only gives birth to sorrow.॥ 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)