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ramayan 6.101.23-24h: इस प्रकार विलाप करते हुए भगवान श्री राम की समस्त इन्द्रियाँ शोक से व्याकुल हो गईं। उस समय सुषेण ने उन्हें सान्त्वना देते हुए यह अद्भुत वस्तु दी-॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  6.101.23-24h 
राममेवं ब्रुवाणं तु शोकव्याकुलितेन्द्रियम्॥ २३॥
आश्वासयन्नुवाचेदं सुषेण: परमं वच:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विलाप करते हुए भगवान श्री राम की समस्त इन्द्रियाँ शोक से व्याकुल हो गईं। उस समय सुषेण ने उन्हें सान्त्वना देते हुए यह अद्भुत वस्तु दी-॥
 
While wailing in this manner, all the senses of Lord Shri Ram became restless with grief. At that time Sushen gave him this wonderful thing while reassuring him -॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)