Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.101.22-23h: महाबाहो! जब मैं पर्वतों और वनों में दुःख से पीड़ित होकर उन्मत्त और निराश हो जाता था, तब आप ही मुझे सान्त्वना देते थे (फिर इस समय आप मुझे सान्त्वना क्यों नहीं दे रहे हैं?)॥22 1/2॥ | ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाबाहो! जब मैं पर्वतों और वनों में दुःख से पीड़ित होकर उन्मत्त और निराश हो जाता था, तब आप ही मुझे सान्त्वना देते थे (फिर इस समय आप मुझे सान्त्वना क्यों नहीं दे रहे हैं?)॥22 1/2॥
Mahabaho! In the mountains and forests when I used to become afflicted with grief and become mad and dejected, it was you who used to console me (then why are you not consoling me at this time?)'॥ 22 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥