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ramayan 6.101.21-22h: 'भैया! मैं तुम्हारे बिना रो रहा हूँ। तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हो? प्रिय मित्र! उठो। आँखें खोलो और देखो। तुम क्यों सो रहे हो? मैं बहुत दुःखी हूँ। मेरी ओर देखो।॥ 21 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  6.101.21-22h 
विलपन्तं च मां भ्रात: किमर्थं नावभाषसे॥ २१॥
उत्तिष्ठ पश्य किं शेषे दीनं मां पश्य चक्षुषा।
 
 
अनुवाद
'भैया! मैं तुम्हारे बिना रो रहा हूँ। तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हो? प्रिय मित्र! उठो। आँखें खोलो और देखो। तुम क्यों सो रहे हो? मैं बहुत दुःखी हूँ। मेरी ओर देखो।॥ 21 1/2॥
 
‘Brother! I am crying without you. Why are you not speaking to me? Dear friend! Get up. Open your eyes and see. Why are you sleeping? I am very sad. Look at me.॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)