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ramayan 6.101.20-21h: हे भाई लक्ष्मण, हे पुरुषोत्तम! हे पराक्रमी योद्धा! तुम मुझे छोड़कर अकेले परलोक क्यों जा रहे हो?॥ 20 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  6.101.20-21h 
हा भ्रातर्मनुजश्रेष्ठ शूराणां प्रवर प्रभो॥ २०॥
एकाकी किं नु मां त्यक्त्वा परलोकाय गच्छसि।
 
 
अनुवाद
हे भाई लक्ष्मण, हे पुरुषोत्तम! हे पराक्रमी योद्धा! तुम मुझे छोड़कर अकेले परलोक क्यों जा रहे हो?॥ 20 1/2॥
 
Oh brother Lakshman, the best of men! Oh mighty warrior! Why are you leaving me and going to the other world alone?॥ 20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)