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ramayan 6.101.19-20h: अतः मेरे लिए यहीं मर जाना अच्छा है। अपने भाइयों के बीच जाकर उनके कटु वचन सुनना अच्छा नहीं है। मैंने पूर्वजन्म में ऐसा कौन-सा अपराध किया था, जिसके कारण मेरे सामने खड़ा मेरा धर्मात्मा भाई मारा गया?॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  6.101.19-20h 
इहैव मरणं श्रेयो न तु बन्धुविगर्हणम्।
किं मया दुष्कृतं कर्म कृतमन्यत्र जन्मनि॥ १९॥
येन मे धार्मिको भ्राता निहतश्चाग्रत: स्थित:।
 
 
अनुवाद
अतः मेरे लिए यहीं मर जाना अच्छा है। अपने भाइयों के बीच जाकर उनके कटु वचन सुनना अच्छा नहीं है। मैंने पूर्वजन्म में ऐसा कौन-सा अपराध किया था, जिसके कारण मेरे सामने खड़ा मेरा धर्मात्मा भाई मारा गया?॥19 1/2॥
 
‘Therefore it is better for me to die here. It is not good to go among my brothers and listen to their bitter words. What crime did I commit in my previous life, due to which my righteous brother standing in front of me was killed?॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)