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ramayan 6.101.16: वीर और पराक्रमी लक्ष्मण के बिना मैं राज्य का क्या करूँगा? मैं अपनी प्यारी माता सुमित्रा से कैसे बात कर सकूँगा?॥16॥   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.101.16 
किं नु राज्येन दुर्धर्षलक्ष्मणेन विना मम।
कथं वक्ष्याम्यहं त्वम्बां सुमित्रां पुत्रवत्सलाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वीर और पराक्रमी लक्ष्मण के बिना मैं राज्य का क्या करूँगा? मैं अपनी प्यारी माता सुमित्रा से कैसे बात कर सकूँगा?॥16॥
 
‘What will I do with the kingdom without the brave and valiant Lakshmana? How will I be able to talk to my loving mother Sumitra?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)