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श्लोक  6.101.15 
देशे देशे कलत्राणि देशे देशे च बान्धवा:।
तं तु देशं न पश्यामि यत्र भ्राता सहोदर:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
स्त्रियाँ तो हर देश में पाई जा सकती हैं, एक ही जाति के भाई हर राष्ट्र में पाए जा सकते हैं; परन्तु मैं ऐसा कोई देश नहीं देखता जहाँ एक ही जाति का भाई मिल सके।
 
Women can be found in every country, brothers of the same caste can be found in every nation; but I do not see any such country where one can find a brother of the same caste.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)