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ramayan 6.101.12: 'अब मुझे इस युद्ध से या अपनी जान बचाने से क्या चाहिए? अब युद्ध करने की कोई ज़रूरत नहीं है। जब लक्ष्मण स्वयं युद्ध के कगार पर ही मरकर हमेशा के लिए सो गए, तो युद्ध जीतने का क्या फ़ायदा?'   |   ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.101.12 
किं मे युद्धेन किं प्राणैर्युद्धकार्यं न विद्यते।
यत्रायं निहत: शेते रणमूर्धनि लक्ष्मण:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'अब मुझे इस युद्ध से या अपनी जान बचाने से क्या चाहिए? अब युद्ध करने की कोई ज़रूरत नहीं है। जब लक्ष्मण स्वयं युद्ध के कगार पर ही मरकर हमेशा के लिए सो गए, तो युद्ध जीतने का क्या फ़ायदा?'
 
‘What do I need from this war or saving my life now? There is no need to fight now. When Lakshmana himself died on the brink of battle and slept forever, then what is the use of winning the war?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)