Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.101.11: हे वीर! यदि मैं युद्ध में विजयी भी हो जाऊँ, तो भी मुझे प्रसन्नता नहीं होगी। यदि चंद्रमा भी अंधे के सामने अपनी चाँदनी बिखेर दे, तो भी उसके हृदय में क्या हर्ष उत्पन्न होगा?॥11॥ | ramayan सर्ग 6.101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विजयोऽपि हि मे शूर न प्रियायोपकल्पते।
अचक्षुर्विषयश्चन्द्र: कां प्रीतिं जनयिष्यति॥ ११॥
अनुवाद
हे वीर! यदि मैं युद्ध में विजयी भी हो जाऊँ, तो भी मुझे प्रसन्नता नहीं होगी। यदि चंद्रमा भी अंधे के सामने अपनी चाँदनी बिखेर दे, तो भी उसके हृदय में क्या हर्ष उत्पन्न होगा?॥11॥
Valiant warrior! Even if I am victorious in the battle, I will not be happy. Even if the moon spreads its moonlight in front of a blind man, what joy will it create in his heart?॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥