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श्लोक 6.100.61  |
तयोर्ज्यातलनिर्घोषो रामरावणयोर्महान्।
त्रासन: सर्वभूतानां सम्बभूवाद्भुतोपम:॥ ६१॥ |
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| अनुवाद |
| राम और रावण के धनुष की प्रत्यंचा से निकली हुई वह महान टंकार समस्त प्राणियों के मन में भय उत्पन्न कर रही थी और अत्यन्त अद्भुत प्रतीत हो रही थी ॥61॥ |
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| The great twanging sound that emerged from the bowstring of Ram and Ravana created terror in the minds of all living beings and appeared very wonderful. 61॥ |
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