vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना
»
श्लोक 58
श्लोक
6.100.58
तथा प्रदीप्तैर्नाराचैर्मुसलैश्चापि रावण:।
अभ्यवर्षत् तदा रामं धाराभिरिव तोयद:॥ ५८॥
अनुवाद
जैसे बादल जल की धारा बरसाते हैं, वैसे ही रावण श्री राम पर चमकते हुए बाणों और मूसलों की वर्षा करने लगा।
Just as a cloud pours down a torrent of water, Ravana began to shower shining arrows and pestles on Sri Rama. 58.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×