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ramayan 6.100.56: आज मैं ऐसा पराक्रम दिखाऊँगा कि जब तक यह पृथ्वी रहेगी, तब तक जड़-चेतन जगत के सभी प्राणी और देवता इस लोक में एकत्रित होकर इस विषय में विचार-विमर्श करेंगे और एक-दूसरे को बताएँगे कि युद्ध किस प्रकार हुआ था॥ 56॥   |   ramayan सर्ग 6.100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  6.100.56 
अद्य कर्म करिष्यामि यल्लोका: सचराचरा:।
सदेवा: कथयिष्यन्ति यावद् भूमिर्धरिष्यति।
समागम्य सदा लोके यथा युद्धं प्रवर्तितम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
आज मैं ऐसा पराक्रम दिखाऊँगा कि जब तक यह पृथ्वी रहेगी, तब तक जड़-चेतन जगत के सभी प्राणी और देवता इस लोक में एकत्रित होकर इस विषय में विचार-विमर्श करेंगे और एक-दूसरे को बताएँगे कि युद्ध किस प्रकार हुआ था॥ 56॥
 
Today I shall display such valour that as long as this earth exists, all living beings and gods of the animate and inanimate world shall gather in this world and discuss about it and shall tell each other about the manner in which the war took place.'॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)