|
| |
| |
श्लोक 6.100.48  |
अस्मिन् मुहूर्ते नचिरात् सत्यं प्रतिशृणोमि व:।
अरावणमरामं वा जगद् द्रक्ष्यथ वानरा:॥ ४८॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| हे वानरों! इस शुभ घड़ी में मैं तुमसे सच्ची प्रतिज्ञा करता हूँ कि कुछ ही समय में यह संसार न तो रावण से रहित हो जायेगा और न ही राम से। |
| |
| O monkeys! In this auspicious moment I make a true promise to you that in a short while this world will be devoid of either Ravan or Ram. |
| ✨ ai-generated |
| |
|