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श्लोक  6.100.46 
लक्ष्मणं परिवार्यैवं तिष्ठध्वं वानरोत्तमा:।
पराक्रमस्य कालोऽयं सम्प्राप्तो मे चिरेप्सित:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे वानरों! तुम सब इसी प्रकार लक्ष्मण को चारों ओर से घेरकर खड़े हो जाओ। अब वह अवसर आ गया है जब मैं वह वीरता प्रदर्शित करूँ जिसकी मुझे बहुत समय से अभिलाषा थी।
 
O monkeys! You all should stand like this surrounding Lakshman from all sides. Now the opportunity has come for me to display that heroic deed which I had been wanting for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)