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श्लोक 6.100.43  |
तां कराभ्यां परामृश्य राम: शक्तिं भयावहाम्।
बभञ्ज समरे क्रुद्धो बलवान् विचकर्ष च॥ ४३॥ |
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| अनुवाद |
| तब महाबली रघुनाथजी ने उस भयंकर शक्ति को दोनों हाथों से पकड़कर लक्ष्मण के शरीर से निकाल लिया और युद्ध में क्रोध करके उसे तोड़ डाला॥43॥ |
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| Then the mighty Raghunath ji caught hold of that terrible power with both his hands and took it out of Lakshman's body and in anger in the battle broke it. 43॥ |
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