श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.100.42 
अर्दिताश्चैव बाणौघैस्ते प्रवेकेण रक्षसाम्।
सौमित्रे: सा विनिर्भिद्य प्रविष्टा धरणीतलम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि वे वानर भी महाराक्षस रावण के बाणों से अत्यन्त व्याकुल थे। वह बाण सुमित्रापुत्र के शरीर को छेदकर पृथ्वी पर पहुँच गया था। 42.
 
Because those monkeys were also very much troubled by the arrows of the greatest demon Ravana. That arrow had pierced the body of Sumitra's son and reached the earth. 42.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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