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ramayan 6.100.39: यह सोचकर कि यह शोक करने का समय नहीं है, श्री रघुनाथजी ने रावण को मारने का निश्चय किया और बड़े यत्न से, अपनी पूरी शक्ति लगाकर, लक्ष्मण की ओर देखते हुए, भयंकर युद्ध करने लगे। 39।   |   ramayan सर्ग 6.100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.100.39 
न विषादस्य कालोऽयमिति संचिन्त्य राघव:।
चक्रे सुतुमलं युद्धं रावणस्य वधे धृत:।
सर्वयत्नेन महता लक्ष्मणं परिवीक्ष्य च॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
यह सोचकर कि यह शोक करने का समय नहीं है, श्री रघुनाथजी ने रावण को मारने का निश्चय किया और बड़े यत्न से, अपनी पूरी शक्ति लगाकर, लक्ष्मण की ओर देखते हुए, भयंकर युद्ध करने लगे। 39।
 
Thinking that this was not the time to be sad, Sri Raghunath resolved to kill Ravana and with great effort, using all his might and looking towards Lakshman, started fighting a fierce battle. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)