श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.100.33 
तामनुव्याहरच्छक्तिमापतन्तीं स राघव:।
स्वस्त्यस्तु लक्ष्मणायेति मोघा भव हतोद्यमा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण की ओर आती हुई उस शक्ति को लक्ष्य करके कहा- 'लक्ष्मण तुम्हारा कल्याण हो, तुम्हारा प्राण-घातक उद्योग नष्ट हो जाए; अतः तुम निकम्मे हो जाओ।
 
Aiming at that power coming towards Lakshman, Lord Shri Ram said – 'May Lakshman be well, may your life-killing industry be destroyed; Therefore you become useless.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas