श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.100.28 
मोक्षितस्ते बलश्लाघिन् यस्मादेवं विभीषण:।
विमुच्य राक्षसं शक्तिस्त्वयीयं विनिपात्यते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे अपने बल के अभिमानी लक्ष्मण! तुमने ऐसा प्रयत्न करके विभीषण को बचाया है, अतः अब मैं उस राक्षस को छोड़कर इसी शक्ति से तुम पर आक्रमण करूँगा॥ 28॥
 
O Lakshmana, who is proud of his strength! You have saved Vibhishan by making such an effort, so now leaving that demon, I will attack you with this power.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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