श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.100.21 
सम्पपात त्रिधा छिन्ना शक्ति: काञ्चनमालिनी।
सविस्फुलिङ्गा ज्वलिता महोल्केव दिवश्च्युता॥ २१॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ण माला से सुशोभित वह शक्ति तीन भागों में विभक्त होकर पृथ्वी पर इस प्रकार गिर पड़ी, मानो आकाश से चिंगारियों सहित कोई विशाल उल्कापिंड गिर पड़ा हो।
 
That Shakti, adorned with a golden garland, split into three parts and fell on the earth as if a huge meteor along with sparks had fallen from the sky.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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