vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना
»
श्लोक 12
श्लोक
6.100.12
ततो विव्याध गात्रेषु सर्वेषु समितिंजय:।
राघवस्तु सुसंक्रुद्धो रावणं बहुभि: शरै:॥ १२॥
अनुवाद
तत्पश्चात् विजयी श्री रघुवीर ने अत्यन्त क्रोधित होकर बहुत से बाण चलाकर रावण के शरीर के सब अंगों को घायल कर दिया॥12॥
After that, the victorious Shri Raghuveer became very angry and shot many arrows and wounded Ravana in all his body parts. 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×