श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.10.9 
पूजितान् दधिपात्रैश्च सर्पिभि: सुमनोक्षतै:।
मन्त्रवेदविदो विप्रान् ददर्श स महाबल:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली विभीषण ने उन वेदमंत्रों को जानने वाले, दही और घी के पात्र हाथ में लिए हुए ब्राह्मणों से भेंट की और उन सबका पुष्पों और चावलों से पूजन किया॥9॥
 
Thereafter the mighty Vibhishana met the Brahmins who knew the Vedic mantras and had vessels of curd and ghee in their hands. They were all worshipped with flowers and rice grains.॥9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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