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ramayan 6.10.25: प्रायः सभी मंत्रीगण इस बात को आपके कानों तक पहुँचाने में संकोच करते हैं; परन्तु जो कुछ मैंने देखा या सुना है, वह आपको अवश्य बताना चाहिए; अतः उस पर विचार करके जैसा उचित समझो वैसा ही करना चाहिए।॥25॥   |   ramayan सर्ग 6.10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.10.25 
प्रापणे चास्य मन्त्रस्य निवृत्ता: सर्वमन्त्रिण:।
अवश्यं च मया वाच्यं यद् दृष्टमथवा श्रुतम्।
सम्प्रधार्य यथान्यायं तद् भवान् कर्तुमर्हति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
प्रायः सभी मंत्रीगण इस बात को आपके कानों तक पहुँचाने में संकोच करते हैं; परन्तु जो कुछ मैंने देखा या सुना है, वह आपको अवश्य बताना चाहिए; अतः उस पर विचार करके जैसा उचित समझो वैसा ही करना चाहिए।॥25॥
 
Almost all the ministers hesitate to convey this information to your ears; but whatever I have seen or heard I must tell you; therefore after giving due thought to it you should do as you deem fit.'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)