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श्लोक 6.10.25  |
प्रापणे चास्य मन्त्रस्य निवृत्ता: सर्वमन्त्रिण:।
अवश्यं च मया वाच्यं यद् दृष्टमथवा श्रुतम्।
सम्प्रधार्य यथान्यायं तद् भवान् कर्तुमर्हति॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| प्रायः सभी मंत्रीगण इस बात को आपके कानों तक पहुँचाने में संकोच करते हैं; परन्तु जो कुछ मैंने देखा या सुना है, वह आपको अवश्य बताना चाहिए; अतः उस पर विचार करके जैसा उचित समझो वैसा ही करना चाहिए।॥25॥ |
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| Almost all the ministers hesitate to convey this information to your ears; but whatever I have seen or heard I must tell you; therefore after giving due thought to it you should do as you deem fit.'॥ 25॥ |
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