श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.10.24 
अयं हि दोष: सर्वस्य जनस्यास्योपलक्ष्यते।
रक्षसां राक्षसीनां च पुरस्यान्त:पुरस्य च॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘सीता का हरण और उससे उत्पन्न अपशकुन यहाँ के सभी लोगों, राक्षसों, नगर और अन्तःपुर को दिखाई दे रहा है ॥24॥
 
‘The abduction of Sita and the bad omen caused by it is visible to all the people here, the demons, the city and the inner city. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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