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ramayan 6.10.23: ‘महाराज! यदि मैंने यह बात मोह या लोभ से कही हो, तो भी आपको मुझमें दोष नहीं निकालना चाहिए।   |   ramayan सर्ग 6.10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.10.23 
इदं च यदि वा मोहाल्लोभाद् वा व्याहृतं मया।
तत्रापि च महाराज न दोषं कर्तुमर्हसि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘महाराज! यदि मैंने यह बात मोह या लोभ से कही हो, तो भी आपको मुझमें दोष नहीं निकालना चाहिए।
 
‘Maharaj! Even if I have said this out of attachment or greed, you should not find fault with me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)