श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.10.21 
क्रव्यादानां मृगाणां च पुरीद्वारेषु संघश:।
श्रूयन्ते विपुला घोषा: सविस्फूर्जितनि:स्वना:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
नगर के सब द्वारों पर झुंड में इकट्ठे हुए मांसाहारी पशुओं की चीखें गड़गड़ाहट के समान सुनाई दे रही हैं॥ 21॥
 
The shrieks of the carnivorous animals, which have gathered in droves at all the city gates, can be heard like the rumbling of thunder.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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