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ramayan 6.10.17: गायों का दूध सूख गया है, बड़े-बड़े हाथी मातृहीन हो गए हैं, घोड़े नये घास से प्रसन्न होकर भी दयनीय स्वर में हिनहिनाते हैं॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.10.17 
गवां पयांसि स्कन्नानि विमदा वरकुञ्जरा:।
दीनमश्वा: प्रहेषन्ते नवग्रासाभिनन्दिन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
गायों का दूध सूख गया है, बड़े-बड़े हाथी मातृहीन हो गए हैं, घोड़े नये घास से प्रसन्न होकर भी दयनीय स्वर में हिनहिनाते हैं॥17॥
 
‘The cows' milk has dried up, the big elephants have become motherless, the horses, though happy with the new grass, neigh in pitiable tones.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)