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ramayan 6.10.11: तत्पश्चात् शिष्टाचार के ज्ञाता विभीषण ने राजा के प्रति 'विजयतां महाराज' आदि शुभ वचनों की परम्परा का प्रयोग किया और राजा द्वारा संकेत से बताए गए स्वर्णमंडित सिंहासन पर बैठ गए ॥11॥   |   ramayan सर्ग 6.10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.10.11 
स राजदृष्टिसम्पन्नमासनं हेमभूषितम्।
जगाम समुदाचारं प्रयुज्याचारकोविद:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शिष्टाचार के ज्ञाता विभीषण ने राजा के प्रति 'विजयतां महाराज' आदि शुभ वचनों की परम्परा का प्रयोग किया और राजा द्वारा संकेत से बताए गए स्वर्णमंडित सिंहासन पर बैठ गए ॥11॥
 
Thereafter, Vibhishana, the expert of etiquette, used the tradition of auspicious words towards the king like 'Vijayataan Maharaj' (Victory to the King) etc. and sat on the gold adorned throne indicated by the king through a visual signal. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)