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ramayan 6.1.5-6h: हनुमानजी के समान बल और पराक्रम से युक्त कौन नहीं है, जो राक्षसों द्वारा रक्षित अत्यंत दुर्जेय लंका में प्रवेश कर सके ॥5 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  6.1.5-6h 
को विशेत् सुदुराधर्षां राक्षसैश्च सुरक्षिताम्॥ ५॥
यो वीर्यबलसम्पन्नो न सम: स्याद्धनूमत:।
 
 
अनुवाद
हनुमानजी के समान बल और पराक्रम से युक्त कौन नहीं है, जो राक्षसों द्वारा रक्षित अत्यंत दुर्जेय लंका में प्रवेश कर सके ॥5 1/2॥
 
Who is not endowed with strength and bravery like Hanuman, who can enter the extremely formidable Lanka protected by demons. 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)