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ramayan 6.1.4-5h: जो लंकापुरी पर देवता, दानव, यक्ष, गन्धर्व, नाग और राक्षस किसी के द्वारा आक्रमण करना असम्भव है और जो रावण द्वारा भली-भाँति सुरक्षित है, उसमें कौन अपने बल का भरोसा करके प्रवेश कर सकता है और वहाँ से जीवित निकल सकता है?॥4 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  6.1.4-5h 
देवदानवयक्षाणां गन्धर्वोरगरक्षसाम्।
अप्रधृष्यां पुरीं लङ्कां रावणेन सुरक्षिताम्॥ ४॥
प्रविष्ट: सत्त्वमाश्रित्य जीवन् को नाम निष्क्रमेत्।
 
 
अनुवाद
जो लंकापुरी पर देवता, दानव, यक्ष, गन्धर्व, नाग और राक्षस किसी के द्वारा आक्रमण करना असम्भव है और जो रावण द्वारा भली-भाँति सुरक्षित है, उसमें कौन अपने बल का भरोसा करके प्रवेश कर सकता है और वहाँ से जीवित निकल सकता है?॥4 1/2॥
 
Who can enter Lankapuri relying on his own strength and come out alive from there, which is impossible to attack by any of the gods, demons, yakshas, ​​gandharvas, serpents and demons, and which is well protected by Ravana?॥ 4 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)