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ramayan 6.1.15: तब कुछ देर विचार करने के बाद रघुवंश के रत्न श्री राम ने वानरराज सुग्रीव से यह बात कही-॥15॥   |   ramayan सर्ग 6.1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.1.15 
ध्यात्वा पुनरुवाचेदं वचनं रघुसत्तम:।
हरीणामीश्वरस्यापि सुग्रीवस्योपशृण्वत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तब कुछ देर विचार करने के बाद रघुवंश के रत्न श्री राम ने वानरराज सुग्रीव से यह बात कही-॥15॥
 
Then, after pondering for a while, Shri Ram, the jewel of the Raghuvanshah, narrated this to the monkey king Sugreeva -॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)