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ramayan 6.1.14: ऐसा कहते हुए रघुनाथजी के शरीर का प्रत्येक अंग प्रेम से भर गया और उन्होंने उन शुद्धात्मा हनुमान् को हृदय से लगा लिया, जो उनकी आज्ञा का सफलतापूर्वक पालन करके लौटे थे॥ 14॥   |   ramayan सर्ग 6.1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.1.14 
इत्युक्त्वा प्रीतिहृष्टाङ्गो रामस्तं परिषस्वजे।
हनूमन्तं कृतात्मानं कृतकार्यमुपागतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहते हुए रघुनाथजी के शरीर का प्रत्येक अंग प्रेम से भर गया और उन्होंने उन शुद्धात्मा हनुमान् को हृदय से लगा लिया, जो उनकी आज्ञा का सफलतापूर्वक पालन करके लौटे थे॥ 14॥
 
While saying this, every part of Raghunath's body was filled with love and he embraced the pure soul Hanuman, who had returned after successfully following his orders.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)