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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना
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श्लोक 13
श्लोक
6.1.13
एष सर्वस्वभूतस्तु परिष्वङ्गो हनूमत:।
मया कालमिमं प्राप्य दत्तस्तस्य महात्मन:॥ १३॥
अनुवाद
इस समय मैं इन महान् आत्मा हनुमान् को ही अपना गहन आलिंगन अर्पित करता हूँ, क्योंकि वे ही मेरे सर्वस्व हैं।॥13॥
At this time I offer only my deep embrace to this great soul Hanuman, because he is my everything.'॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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