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ramayan 5.8.2: सुन्दरता आदि की दृष्टि से इसकी रचना का कोई माप नहीं था। इसका निर्माण अद्वितीय रीति से किया गया था। स्वयं विश्वकर्मा ने इसे बनाया था और इसे अति उत्तम कहकर इसकी प्रशंसा की थी। जब यह आकाश में उठकर वायुमार्ग में स्थित हुआ, तब यह सूर्यमार्ग के चिह्न के समान सुन्दर प्रतीत हुआ।   |   ramayan सर्ग 5.8: हनुमान् जी के द्वारा पुनः पुष्पक विमान का दर्शन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 8: हनुमान् जी के द्वारा पुनः पुष्पक विमान का दर्शन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.8.2 
तदप्रमेयप्रतिकारकृत्रिमं
कृतं स्वयं साध्विति विश्वकर्मणा।
दिवं गते वायुपथे प्रतिष्ठितं
व्यराजतादित्यपथस्य लक्ष्म तत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
सुन्दरता आदि की दृष्टि से इसकी रचना का कोई माप नहीं था। इसका निर्माण अद्वितीय रीति से किया गया था। स्वयं विश्वकर्मा ने इसे बनाया था और इसे अति उत्तम कहकर इसकी प्रशंसा की थी। जब यह आकाश में उठकर वायुमार्ग में स्थित हुआ, तब यह सूर्यमार्ग के चिह्न के समान सुन्दर प्रतीत हुआ।
 
Its creation could not be measured in terms of beauty etc. It was constructed in a unique manner. Vishwakarma himself had made it and praised it by calling it very good. When it rose in the sky and was situated in the air path, it looked beautiful like the sign of the solar path. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)