श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.7.8 
यथा नगाग्रं बहुधातुचित्रं
यथा नभश्च ग्रहचन्द्रचित्रम्।
ददर्श युक्तीकृतचारुमेघ-
चित्रं विमानं बहुरत्नचित्रम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जैसे पर्वत शिखर अनेक धातुओं के कारण सुन्दर लगते हैं, आकाश ग्रहों और चन्द्रमा के कारण सुन्दर लगता है और सुन्दर बादल अपने अनेक रंगों के कारण सुन्दर लगते हैं, वैसे ही वह विमान भी नाना प्रकार के रत्नों से निर्मित होने के कारण सुन्दर लगता था ॥8॥
 
Just as mountain peaks are beautiful because of the many metals, the sky is beautiful because of the planets and the moon, and the beautiful clouds are beautiful because of their many colours, similarly that aircraft also appeared beautiful because it was made of various kinds of gems. ॥ 8॥
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